Home/About Project


परियोजना के सन्दर्भ में

Blog Image

यह अनुमान है कि भारत में प्रति वर्ष 251 घन किमी भूजल मुख्य रूप से सिंचाई के उद्देश्य से निकला जाता है। राजस्थान, पंजाब और हरियाणा राज्यों के क्षेत्रों में भूजल स्तर 17.7 घन किमी / वर्ष की दर से घट रहा है।

इस तरह के संदर्भ में, वर्षा जल संचयन (RWH) के साथ प्रबंधित जलभृत् पुनर्भरण (MAR) को एक स्थायी जल प्रबंधन समाधान माना जाता है। यह दृष्टिकोण जलभृतों को फिर से भरने में मदद करता है जो की जल भण्डारण की सुविधा प्रदान करता है इस जल को शुष्क मौसम, उच्च मांग अवधि या पर्यावरणीय आवश्यकताओं के दौरान बाद में उपयोग किया जाता है।

प्रबंधित जलभृत् पुनर्भरण संरचनाएं सरल और परिनियोजन के लिए सस्ती हैं: अंतःस्त्रवण तालाब, चेक डैम या अधिक नवीन संरचनाएं जैसे रेत के बांध वर्तमान में दुनिया भर में वर्षा जल संचयन प्रयोजनों के लिए उपयोग किए जाते हैं। फिर भी, स्थानीय स्तर पर वर्षा जल संचयन के दौरान भूजल की गुणवत्ता पर उनके प्रभाव की उत्तम जानकारी की आवश्यकता है और पारिस्थितिक और मानव दोनों जोखिमों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

इसलिए, हमारा शोध फील्ड डेटा और प्रयोगशाला साक्ष्य प्राप्त करने के साथ-साथ सिमुलेशन मॉडल विकसित करने के लिए उपरोक्त मुद्दों पर केंद्रित है जो प्रबंधित जलभृत् पुनर्भरण में योगदान देने वाले वर्षा जल संचयन संरचनाओं के डिजाइन, स्थान और संचालन में एक बदलाव को सूचित करेगा।

चुनौती

राजस्थान राज्य में भूजल निकासी के दर 37% अधिक है जो कि पुनर्भरण की तुलना में दूसरी उच्चतम दर है। इसके अतिरिक्त, यह राज्य भू-जनित फ्लोराइड संदूषण (91% प्रभावित जिलों) से गंभीर रूप से प्रभावित है। इस प्रकार, वर्षा जल संचयन संरचनाओं का उपयोग बजट और भूजल की गुणवत्ता दोनों में सुधार करने के लिए एक विवेकपूर्ण दृष्टिकोण है। व्यापक कार्यान्वयन में आने वाली बाधाओं में से एक स्थानीय स्तर पर भूजल की गुणवत्ता पर वर्षा जल संचयन के प्रभाव का सही मूल्यांकन और इस अभ्यास से जुड़े संभावित पर्यावरणीय और स्वास्थ्य जोखिम शामिल हैं।

उद्देश्य

परियोजना का उद्देश्य भूजल की गुणवत्ता पर प्रबंधित जलभृत् पुनर्भरण के लिए उपयोग किए जाने वाले वर्षा जल के प्रभाव का आकलन करना है और विशेष रूप से यह समझना है कि वर्षा जल में मौजूद घुलित कार्बनिक पदार्थ DOM फ्लोराइड और अन्य प्रदूषक स्तरों को कैसे प्रभावित करता है, जिससे भारत देश में राजस्थान राज्य के चयनित स्थलों में प्रबंधित जलभृत् पुनर्भरण संरचना डिजाइन और प्रबंधन प्रथाओं में सुधार होता है। एक व्यापक सतही जल और भूजल की गुणवत्ता की निगरानी कार्यक्रम के माध्यम से पारंपरिक और उभरती हुई दोनों प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, उपरोक्त ज्ञान अंतर को कम करने के लिए परियोजना के विशिष्ट उद्देश्य निम्न हैं:

1. राजस्थान में तीन चयनित प्रबंधित जलभृत् पुनर्भरण स्थलों पर जल स्तर और गुणवत्ता का मूल्यांकन;;

2. चयनित स्थलों पर प्रबंधित जलभृत् पुनर्भरण सिस्टम के लिए जिम्मेदार भूजल के अनुपात का आकलन करना;

3. प्रदूषकों की नियति और परिवहन पर वर्षा जल के साथ जलभृतों को पुनर्भरण करने के परिणामों की जांच करना एवं फ्लोराइड के उपचारण और अन्य भूजल संदूषकों में वर्षा जल के स्तर की भूमिका को समझना;

4. जल निकायों में सूक्ष्म-प्रदूषकों का पता लगाने की सुविधा हेतु विश्लेषणात्मक प्रोटोकॉल विकसित करना;

5. प्रबंधित जलभृत् पुनर्भरण संरचना के साथ स्थानीय उपयोगकर्ताओं की अन्तः क्रिया एवं जल प्रबंधन में उनकी भूमिका को भी समझना ।